• Welcome to Deptt. of Dairy Development, Uttarakhand.
menu
About Us
 
डेरी विकास विभाग का संक्षिप्त इतिहास-
 
 
 वर्ष  विवरण
 1947  उत्तर प्रदेश के सहकारिता विभाग के अधीन दुग्ध विकास कार्यक्रमों का क्रियान्वयन प्रारम्भ किया गया।
 
  1949  नैनीताल (हल्द्वानी) दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ का गठन किया गया
 1954 
 अल्मोड़ा दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ का गठन किया गया।
 1956  देहरादून दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ का गठन किया गया।
 1962
देहरादून व लालकुंआ में डेरी प्लान्ट की स्थापना कर क्रमशः देहरादून दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ व नैनीताल दुग्ध उत्पादक सहकारी  संघ को सौपे गये।
 1970  पिथौरागढ़ दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ एवं कोटद्वार (गढ़वाल) दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ का गठन किया गया।
 1976  सहकारिता विभाग से उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दुग्ध विकास विभाग की एक स्वतंत्र विभाग के रूप में स्थापना की गयी।
 उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश दुग्ध अधिनियम 1976 पारित किया गया तथा उ0प्र0 राज्य दुग्ध परिषद की स्थापना की गयी। 
 उत्तर प्रदेश राज्य दुग्ध परिषद के सचिव एवं दुग्ध विकास विभाग के विभागाध्यक्ष ”दुग्ध आयुक्त" को सहकारी समिति अधिनियम एवं    
 उसके संगत नियमों के अन्तर्गत दुग्ध सहकारी समितियों के निबन्धक के अधिकार प्रदत्त किये गये।
 दुग्ध अवशीतन केन्द्र पिथौरागढ़ एवं कोटद्वार (पौड़ी गढ़वाल) की स्थापना की गयी।
 1985   अल्मोड़ा जनपद में ताड़ीखेत दुग्घ अवशीतन केन्द्र की स्थापना की गयी।
 1989 टिहरी व चमोली दुग्ध संघों का गठन किया गया।
1990 
उत्तरकाशी दुग्ध संघ का गठन किया गया।बीस हजार लीटर क्षमता के बाजपुर (उद्यमसिंहनगर) अवशीतन केेन्द्र की स्थापना की गयी।
1991
श्रीनगर (गढवाल) में बीस हजार लीटर क्षमता की फीडर बैलेसिंग डेरी की स्थापना की गयी। कोटद्वार दुग्ध संघ का निबन्धन निरस्त करते हुए क्षेत्र की दुग्ध समितियों को गढ़वाल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ से सम्बद्ध किया गया।  नैनीताल जनपद में भू्रण प्रत्यारोपण स्टेट सेन्टर लालकुआं की स्थापना की गयी।
उत्तर प्रदेश शासन द्वारा मुख्य दुग्धशाला विकास अधिकारी के पद के सृजन के साथ-साथ उन्हें विभागाध्यक्ष एवं दुग्ध सहकारिताओं के   निबन्धक का अधिकार प्रदत्त किया गया।
1992
रूद्रपुर (उद्यमसिंहनगर) में 100 मै0टन दैनिक क्षमता की पशु आहार निर्माणशाला की स्थापना की गयी।
खटीमा में दस हजार लीटर क्षमता के दुग्ध अवशीतन केन्द्र की स्थापना की गयी।
1994
ताड़ीखेत दुग्ध अवशीतन केन्द्र की विस्तारीकरण कर उसकी क्षमता 2 से बढ़ाकर 5 हजार लीटर की गयी।
 बागेश्वर दुग्ध अवशीतन केन्द्र की स्थापना की गयी।
1995  चम्पावत दुग्ध अवशीतन केन्द्र की स्थापना की गयी।
1996 पिथौरागढ़ दुग्ध संघ का विस्तारीकरण प्रारम्भ किया गया।
1997 अल्मोडा जनपद में चैखुटिया दुग्ध अवशीतन केन्द्र की स्थापना की गयी।
अल्मोड़ा जनपद में मारचूला दुग्ध अवशीतन केन्द्र की स्थापना की गयी।
2001
सिमली(कर्णप्रयाग)में चिलिंग सेन्टर का कार्य प्रारम्भ हुआ।
 उत्तरकाशी चिलिंग सेन्टर का कार्य प्रारम्भ हुआ।
2001
विभाग की पुर्नसंरचना की गई तथा मुख्य दुग्धशाला विकास अधिकारी का पद का नाम परिवर्तित करते हुए इसे निदेशक, डेरी विकास घोषित किया गया। निदेशालय का मुख्यालय  हल्द्वानी (नैनीताल) में स्थापित करने का निर्णय हुआ तथा निदेशक को विभागाध्यक्ष घोषित किया गया।
 उत्तराखण्ड शासन के अपर सचिव (दुग्ध) को पदेन दुग्ध आयुक्त घोषित किया गया।
 उत्तराखण्ड सहकारी डेरी फेडरेशन का गठन किया गया। दुग्ध आयुक्त को फेडरेशन का पदेन प्रबन्ध निदेशक तथा निदेशक को पदने मुख्य महाप्रबन्धक घोषित किया गया।
2004 डेरी विकास विभाग में पदो की पुर्नसंरचना की गई। विभाग हेतु कुल 205 पद स्वीकृत किये गये। दुग्ध आयुक्त का पदनाम परिवर्तित करते हुए इसे निदेशक, डेरी विकास एवं विभागाध्यक्ष घोषित किया गया।
 
 
 
 
 
 

                                

Copyright © 2017 dairyvikasuttarakhand.org, All rights reserved.